“पशु हो जाएं !” – ओशो

ध्यान में प्रवेश की सहज विधि 
रात में एक ध्यान करना शुरु करें | भाव करें कि आप मनुष्य है ही नहीं | आप कोई भी पशु चुन सकते हैं जो आपको अच्छा लगे | यदि आपको बिल्ली अच्छी लगती है, ठीक है | यदि आपको कुत्ता अच्छा लगता है. ठीक है | या बाघ; नर, मादा जो भी आपको अच्छा लगे | कुछ भी चुन लें, पर फिर वह बने रहे | फिर वही पशु हो जाए | चारों हाथों-पैरों से कमरे में घूमे और बिल्कुल वह पशु हो जाए |
15 मिनट तक इस कल्पना का जितना आनंद ले सकें, लें | यदि आप एक कुत्ते हैं तो भोंके वह सब करें जो एक कुत्ता कर सकता है – और सच में करें ! उसका आनंद लें | और रोके नहीं , क्योंकि कुत्ता कुछ भी रोक नहीं सकता | कुत्ते का मतलब है पूर्ण स्वतंत्रता | तो उस क्षण जो भी हो, करें | उस क्षण मनुष्य के नियंत्रण करने के स्वभाव को बीच में मत लाएं | सच में पूरी तरह से कुत्ता ही हो जाएं | 15 मिनट तक कमरे में घूमते रहें – भौके, उलझे ,झपटे |
इससे मदद मिलेगी | हमें थोड़ी पशु ऊर्जा की जरूरत है | हम बहुत सय और बहुत सुसंस्कृत हो गए हैं और वही हमें पंगु कर रहा है |अत्याधिक सयता पैरालिसिस जैसी हो जाती है | थोड़ी मात्रा में वह ठीक है, लेकिन अधिक हो जाए तो बहुत खतरनाक है | व्यक्ति में पशु हो जाने की क्षमता हमेशा रहनी चाहिए | आपकी पशुता को स्वतंत्र करना है | यदि आप थोड़ा जंगली होना सीख जाए तो आपकी काफी समस्याएं विलीन हो जाएंगी |
तो आज रात से ही शुरु कर दें और उसका आनंद लें !

– ओशो

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