“रात्रि ध्यान” – ओशो

यह विधि बहुत-बहुत बुनियादी है। इसे बहुत प्रयोग में लाया गया—विशेषकर बुद्ध के द्वारा। और इस विधि के अनेक प्रकार है। उदाहरण के लिए, रात में जब तुम सोने लगो, गहरी नींद में उतरने लगो तो पूरे दिन के अपने जीवन को याद करो। इस याद की दिशा उलटी होगी, यानी उसे सुबह से न शुरू कर वहां से शुरू करो जहां तुम हो। अभी तुम बिस्तरे में पड़े हो तो बिस्तर में लेटने से शुरू कर पीछे लोटों। और इस प्रकार कदम-कदम पीछे चलकर सुबह की उस पहली घटना पर पहु्ंचो जब तुम नींद से जागे थे अतीत स्मरण के इस क्रम में सतत याद रखो कि पूरी घटना से तुम पृथक हो, अछूते हो।

उदाहरण के लिए, पिछले पहर तुम्हारा किसी ने अपमान किया था; तुम अपने रूप को अपमानित होते देखो, लेकिन द्रष्टा बने रहो। तुम्हें उस घटना में फिर नहीं उलझना है, फिर क्रोध नहीं करना है। अगर तुमने क्रोध किया तो तादात्म्य पैदा हो गया। तब ध्यान का बिंदु तुम्हारे हाथ से छूट गया।इसलिए क्रोध मत करो। वह अभी तुम्हें अपमानित नहीं कर रहा है। वह तुम्हारे पिछले पहर के रूप को अपमानित कर रहा है। वह रूप अब नहीं है। तुम तो एक बहती नदी की तरह हो जिसमें तुम्हारे रूप भी बह रहे है। बचपन में तुम्हारा एक रूप था, अब वह नहीं रहा। वह जा चुका। नदी की भांति तुम निरंतर बदलते जा रहे हो।रात में ध्यान करते हुए जब दिन की घटनाओं को उलटे क्रम में, प्रतिक्रम में याद करो तो ध्यान रहे कि तुम साक्षी हो, कर्ता नहीं। क्रोध मत करो। वैसे ही जब तुम्हारी कोई प्रशंसा करे तो आह्लादित मत होओ। फिल्म की तरह उसे भी उदासीन होकर देखो।प्रतिक्रमण बहुत उपयोगी है, खासकर उनके लिए जिन्हें अनिद्रा की तकलीफ हो। अगर तुम्हें ठीक से नींद आती है। अनिद्रा का रोग है। तो यह प्रयोग तुम्हें बहुत सहयोगी होगा। क्यों? क्योंकि यह मन को खोलने का, निर्ग्रंथ करने का उपाय है।

– ओशो

[विज्ञान भैरव तंत्र -22]

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6 thoughts on ““रात्रि ध्यान” – ओशो

  • July 27, 2015 at 3:08 PM
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    I will definitely try this.

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    • July 27, 2015 at 3:14 PM
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      Dear Sir,
      If you try any meditation technique, make sure you do it for at least 15 days.
      Thank You.

      Reply
    • September 13, 2016 at 5:17 PM
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      Dear Team,
      I want to join one day meditation camp, now I’m living in gurgaon so kindly reply for the same

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  • September 20, 2015 at 2:51 AM
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    Pratikraman ki prakriya thodi asahaj malum hoti hai. Subah se suru karna jyada asan malum hota hai. Kya sabhi ghatnaon ka smaran sambhav hai? Kyunki lautne mein kai ghatnaon ki smrity nahi rahti hai aur vo baad mein yaad ati hain. Kripaya margdarshan karein.

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    • September 20, 2015 at 4:01 AM
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      Gyanendra Ji,
      Jitni bhi ghatnao ka smaran ata hai..unhi se shuru karein ! Har ke ghatna se apne ko door karke dekhein, sabhi ghatnao ko yaad nahi karna hai; jo bhi sahaj aa jaye unhi se shuru karein ! Ye vidhi sakshi sadhna ke liye upyogi hai !
      Thanks You.

      Reply

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