जीवन का सूत्र – “बिल्‍ली मत पालना” !!

एक बार एक महात्मा मरने के करीब था। उसने अपने प्रिय शिष्य को अपने पास बुलाया और कहने लगा। देख तू मेरी एक बात मान जो चाहे करना पर बिल्‍ली मत पालना। ये में अपने जीवन भी निचोड़ तुझे दिये जा रहा हूं। ये तेरी जीवन का सूत्र है।

शिष्‍य ने कहा पर गुरूदेव में इस सूत्र का अर्थ समझ नहीं पाया। पर गुरु के पास समय कम था सो वह स्‍वर्ग सीधार गये। अब युवक उस सूत्र में उलझा रह गया। कितने शास्त्र पढ़े पर उसका हल नहीं मिला। अब गुरु की बात को झूठ तो मान नहीं सकता। उपनिषद, पुराण, सभी धार्मिक ग्रंथों में टटोल लिया पर उस गूढ सूत्र का रहस्‍य नहीं मिला तो नहीं मिला। पर शिष्‍य की समझ में ये नहीं आ रहा था की बिल्‍ली का अध्‍यात्‍म से क्‍या रहस्‍य हो सकता है।

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“Boredom,Intelligence and Laughter” – OSHO

This is worth considering. It is significant. The first thing to understand is that except for man, no animal is

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“सर्कस में राजनेता” – ओशो

एक राजनेता चुनाव में हार गये। राजनेता थे, और कुछ जानते भी नहीं थे। ने पढ़े-लिखे थे, एक दम से अंगूठा छाप थे। राजनेता होने के लिए अंगूठा छाप होना एक योग्‍यता है। सब तरह से अयोग्‍य होना योग्‍यता है। चुनाव क्‍या हार गए। बड़ी मुश्‍किल में पड़ गये। कोई नौकरी तो मिल नहीं सकती थी, कहीं चपरासी की भी नौकरी नहीं मिली। नेताजी परेशान बाकें हाल, बिना काम के घर में कौन घुसने दे। सब अमचे चमचे भी साथ छोड़ गये।

अचानक नेता का भाग्‍य खुला और सर्कस गांव में आ गया। सो सर्कस के मैनेजर से कहा कि भईया, कोई काम पर लगा दो। अरे घोड़े को नहलाता रहूंगा। गधे को नहलाता रहूंगा, यूं भी जिंदगी घोड़ों और गधों के बीच ही बीती है। कोई भी काम कर सकता हूं। प्रमाण के लिए इतना काफी है कि दस साल तक संसद का सदस्‍य रहा हूं। अब इससे बुरा और क्‍या काम होगा। तुम जो कहो करूंगा; गोबर, लीद,जो भी कहां सब सफाई कर दूँगा।

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