“अंतर्यात्रा में गुरु की जरूरत” – ओशो शैलेन्द्र

प्रभु सर्वशक्तिमान नही है, ओमनीपोटेंट नही है, एक काम वह नही कर सकता, परमात्मा स्वयं परमात्मा का ज्ञान हमें नही दे सकता, गुरु ही वह कार्य कर सकता है।इसलिए इस भ्रम में नही रहना कि तुम्हें सीधा ज्ञान मिल जाएगा, बिना गुरु के हरि का ज्ञान नही हो सकता। यह कहावत ठीक ही है कि गुरु बिन होय न ज्ञान।

Read more
%d bloggers like this: