जीवन का सूत्र – “बिल्‍ली मत पालना” !!

एक बार एक महात्मा मरने के करीब था। उसने अपने प्रिय शिष्य को अपने पास बुलाया और कहने लगा। देख तू मेरी एक बात मान जो चाहे करना पर बिल्‍ली मत पालना। ये में अपने जीवन भी निचोड़ तुझे दिये जा रहा हूं। ये तेरी जीवन का सूत्र है।

शिष्‍य ने कहा पर गुरूदेव में इस सूत्र का अर्थ समझ नहीं पाया। पर गुरु के पास समय कम था सो वह स्‍वर्ग सीधार गये। अब युवक उस सूत्र में उलझा रह गया। कितने शास्त्र पढ़े पर उसका हल नहीं मिला। अब गुरु की बात को झूठ तो मान नहीं सकता। उपनिषद, पुराण, सभी धार्मिक ग्रंथों में टटोल लिया पर उस गूढ सूत्र का रहस्‍य नहीं मिला तो नहीं मिला। पर शिष्‍य की समझ में ये नहीं आ रहा था की बिल्‍ली का अध्‍यात्‍म से क्‍या रहस्‍य हो सकता है।

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“वासना:: कुत्ता और हड्डी” – ओशो

तुम्हारी हालत कुत्ते जैसी हो गयी है। कुत्ते को देखा है? सूखी हड्डियां चूसता है, जिनमें कुछ रस नहीं है।

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“अहंकार त्याग:: गौतम बुद्ध और यशोधरा” – ओशो

गौतम बुद्ध ज्ञान को उपलब्ध होने के बाद घर वापस लौटे। बारह साल बाद वापस लौटे। जिस दिन घर छोड़ा

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“प्रेम पर भरोसा करो !” – ओशो

एक बड़ी प्राचीन कथा है। एक सम्राट अपने वजीर पर नाराज हो गया। उसने उसे एक मीनार पर बंद करवा

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“विक्रम-बेताल” – ओशो

बेताल पच्चीसी से एक कहानी है , पहली कहानी , “पहले विक्रम बेताल का थोडा परिचय दे दू , विक्रमादित्य

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“जिंदगी की कहानी…” – ओशो

जिंदगी की कहानी | टॉल्सटॉय की प्रसिद्ध कहानी है कि एक आदमी के घर एक संन्यासी मेहमान हुआ – एक

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