“लोग नशे के आदी क्यों हो जाते हैं?” – डॉ. ओशो शैलेन्द्र

आदत कोई भी हो, उसकी जो बुनियाद है, वह है- एक प्रकार की मूर्च्छा, प्रमाद। व्यक्ति एक प्रकार की बेहोशी में होता है और वही-वही किये चला जाता है। वह आदत कब और कैसे शुरु हुई, इसका ख्याल भी नहीं रहता। अगर यही बात ख्याल में आ जाए तो वह आदत छूटनी शुरु हो सकती है। किसी भी प्रकार के नशे से मुक्त होने के लिए यह गौर करना ज़रूरी है कि आपके जीवन में ऐसी कौन सी आदत है जो आपके व्यक्तित्व, शरीर या मन को नुकसान पहुंचा रही है। संभव है, वह कहीं दूर, बचपन की कोई चीज हो, जिसे आप भूल भी चुके हों। इसलिए, यहां यह समझना उपयोगी होगा कि आदतें शुरु कैसे होती हैं।

Read more
%d bloggers like this: