“Love is My Message” – OSHO

I love you. Love is my message — let it be your message too. Love is my color and my climate. To me, love is the only religion. All else is just rubbish, all else is nothing but mind-churning dreams. Love is the only substantial thing in life, all else is illusion. Let love grow in you and God will be growing on its own accord. If you miss love you will miss God and all.

There is no way to God without love. God can be forgotten — if love is remembered, God will happen as a consequence. It happens as a consequence. It is the fragrance of love and nothing else. In fact there is no God but only godliness. There is no person like God anywhere. Drop all childish attitudes, don’t go on searching for a father.

Read more

“प्रेम दगाबाज़ है ! ” – ओशो

किसी ने धोखा नहीं दिया है। जिस दिन तुम्हारा और तुम्हारी प्रेयसी के बीच प्रेम चुक जाएगा, उस दिन तुम यह मत सोचना कि प्रेयसी ने धोखा दिया है; यह मत सोचना कि प्रेमी दगाबाज निकला। नहीं, प्रेम दगाबाज है। न तो प्रेयसी दगाबाज है, न प्रेमी दगाबाज है—प्रेम दगाबाज है।

जिसे तुमने प्रेम जाना था वह क्षणभंगुर था, पानी का बबूला था।

Read more

“सफल प्रेम भी हैं असफल !” – ओशो

जिनके प्रेम सफल हो गए हैं, उनके प्रेम भी असफल हो जाते हैं। इस संसार में कोई भी चीज सफल हो ही नहीं सकती। बाहर की सभी यात्राएं असफल होने को आबद्ध हैं। क्यों? क्योंकि जिसको तुम तलाश रहे हो बाहर, वह भीतर मौजूद है। इसलिए बाहर तुम्हें दिखाई पड़ता है और जब तुम पास पहुंचते हो, खो जाता है। मृग-मरीचिका है। दूर से दिखाई पड़ता है।
तुम्हारा प्रेम तो शोषण है। पुरुष स्त्री को शोषित करना चाहता है, स्त्री पुरुष को शोषित करना चाहती है। इसीलिए तो स्त्री-पुरुषों के बीच सतत झगड़ा बना रहता है। पति-पत्नी लड़ते रहते हैं। उनके बीच एक कलह का शाश्वत वातावरण रहता है। कारण है क्योंकि दोनों एक-दूसरे को कितना शोषण कर लें, इसकी आकांक्षा है। कितना कम देना पड़े और कितना ज्यादा मिल जाए इसकी चेष्टा है। यह संबंध बाजार का है, व्यवसाय का है।

Read more

“प्रेम, संबंध नहीं है ! ” – ओशो

प्रेम की अभीप्सा असफल हो जाती हो तो जीवन व्यर्थ दिखायी पड़ने लगे–अर्थहीन, मीनिंगलेस, फस्ट्रेशन मालूम पड़े, विफलता मालूम पड़े, चिंता मालूम पड़े तो कोई आश्चर्य नहीं है। जीवन की केंद्रीय प्यास ही सफल नहीं हो पाती है! न तो हम प्रेम दे पाते हैं और न उपलब्ध कर पाते हैं। और प्रेम जब असफल रह जाता है, प्रेम का बीज जब अंकुरित नहीं हो पाता, तो सारा जीवन व्यर्थ-व्यर्थ, असार-असार मालूम होने लगता है।
जीवन भर प्रयास करते हैं? सारे प्रयास प्रेम के आसपास ही होते हैं। युद्ध प्रेम के आसपास लड़े जाते हैं। धन प्रेम के आसपास इकट्ठा किया जाता है। यश की सीढ़ियां प्रेम के लिए पार की जाती हैं। संन्यास प्रेम के लिए लिया जाता है। घर-द्वार प्रेम के लिए बसाये जाते हैं और प्रेम के लिए छोड़े जाते हैं। जीवन का समस्त क्रम प्रेम की गंगोत्री से निकलता है।
लेकिन यह प्रेम है क्या? यह प्रेम की अभीप्सा क्या है? यह प्रेम की पागल प्यास क्या है? कौन-सी बात है, जो प्रेम के नाम से हम चाहते हैं और नहीं उपलब्ध कर पाते हैं?

Read more

“Men and Women : Polar Opposites” – OSHO

There is a difference between the male mind and the female mind; their functioning is different. They are polar opposites — never forget that. Spiritually they are exactly the same, but physiologically they are poles apart; they function in different ways.
Men are happier being married than not because when they are not married they simply feel lonely. When they are married, even if the marriage is miserable, it is better than to be lonely; at least there is something to keep you occupied. Misery also keeps you occupied and man always wants to remain occupied — something on the outside so that he need not go in, so he can keep his eyes open.
The woman is not so interested in the outside, so when a woman is unmarried she feels more alone than lonely. And she can enjoy her aloneness better than a man because she is more inner-directed — she is more selfish, in a way. I am using the word with a very positive meaning: she is selfish, she is self-centered. The man is other-centered; he is constantly thinking of others.

Read more

“प्रेम मांग नहीं हैं !!! ” – ओशो

प्रेम की मांग कभी मत करो, प्रेम अपने आप आएगा। तुम प्रेम दोगे, वह आएगा…और आएगा। वह देने से बढ़ता

Read more

“प्रेम पर भरोसा करो !” – ओशो

अभी प्रेम की और भी मंजिलें हैं, और प्रेम के अभी और भी इप्तिहान हैं, परीक्षाएं हैं। और प्रेम की आखिरी परीक्षा परमात्मा है। ध्यान रखना, जो तुम्हें फैलाए वही तुम्हें परमात्मा तक ले जाएगा। प्रेम फैलाता है, भय सिकुडाता है।
संसार से डरो मत, परमात्मा से भरो। जितने ज्यादा तुम परमात्मा से भर जाओगे, तुम पाओगे, तुम संसार से मुक्त हो गए। संसार तुम्हें पकड़े हुए मालूम पड़ता है, क्योंकि तुम्हारे हाथ में कुछ और नहीं है। आदमी के पास कुछ- न हो तो कंकड़-पत्थर भी इकट्ठे कर लेता है। हीरे की खदान न हो तो आदमी पत्थरों को ही इकट्ठे करता चला जाता है। मैं तुमसे कहता हूं? हीरे की खदान पास ही है। मैं तुमसे कंकड़-पत्थर छोड़ने को नहीं कहता। मैं तुमसे त्याग की बात ही नहीं करता। जीवन महाभोग है। जीवन उत्सव है।
मैं तुमसे यही कहता हूं कि जब विराट तुम्हारे भीतर उतरेगा, क्षुद्र अपने आप बह जाएगा। तुम विराट का भरोसा करो, क्षुद्र का भय नहीं। तुम विराट को निमंत्रण दो, क्षुद्र को हटाओ मत।

Read more

“प्रेम: समर्पण है, ईर्ष्या और शोषण नहीं” – ओशो

“प्रेम तो समर्पण है, मालकियत नहीं “ प्रेम में ईर्ष्या हो तो प्रेम ही नहीं है, फिर प्रेम के नाम

Read more

“स्त्री पहली बार हो रही है चरित्रवान” – ओशो

“स्त्री पहली बार हो रही है चरित्रवान”  –  ओशो तुम्हारे चरित्र का एक ही अर्थ होता है बस कि स्त्री

Read more

“बच्चों में डर क्यों?” – ओशो

“बच्चों के मन में डर क्यों?” – ओशो छुटपन से ही छोटे-छोटे बच्चे भी डर जाते हैं। बच्चे की समझ

Read more

“Friendship Is Higher Than Love” – OSHO

Friendship has a higher quality than love. The next step of love is friendship. Not that it is lower, as it is understood ordinarily; it is not.
In love there is passion, lust; love is more rooted in the physical. Friendship is purer, not rooted in the sexual at all. Friendship is between two beings: it is asexual and transcendental to the physical.
Friendship has a coolness in it. Love has heat, hence it goes high, low; sometimes everything is beautiful and sometimes everything is ugly. Love changes. Friendship has a more eternal quality to it; it doesn’t change.

Read more

“प्रेम ही परमात्मा है” – ओशो

प्रेम ही परमात्मा है | प्रेम शब्द से न चिढ़ो। यह हो सकता है कि तुमने जो प्रेम समझा था

Read more
%d bloggers like this:
Sign up for OshoDhara Updates

Enter your email and Subscribe.

Subscribe!